Abhijeet Dipke Protest| Dharmendra Pradhan Resignation Demand. वक्त आ चुका है। हम सब को साथ आना होगा और भारत के संविधान के रास्ते पर चलते हुए पीसफुली अपनी आवाज़ उठाकर धर्मेंद्र प्रधान के रेजिग्नेशन की डिमांड करनी होगी। अगर हम सब साथ मिलकर आवाज़ उठाएंगे तो ज़रूर इनको हमारी बात माननी होगी। मैंने डिसाइड किया है मैं 6 जून सैटरडे सुबह दिल्ली आऊंगा। आप सब मुझे एयरपोर्ट पर मिलिए।
एक तरफ भारत के बच्चे होंगे और दूसरी तरफ नरेंद्र मोदी। 26 साल के इस छोकरे के ऐलान पर नरेंद्र मोदी एंड बीजेपी कंपनी का चेहरा सूख कर छुआरा हो गया। पूछिए क्यों? क्योंकि अब जीत दपके हैं। कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी में पढ़ते हैं। लेकिन नीट सीबीएसई एसएससी और सीयूईटी की जैसी परीक्षाओं में नरेंद्र मोदी की महान कामयाबियों को सेलिब्रेट करने भारत आ रहे हैं।
कॉकरोच जनता पार्टी पहली बार जमीन पर उतरने जा रही है। और इसका पहला नारा है धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो। आज नीट के 22 लाख स्टूडेंट्स सीबीएसई के 17 लाख स्टूडेंट्स सीयूईटी के 16 लाख स्टूडेंट्स और एसएससी जीडी के 40 लाख स्टूडेंट्स। ऐसे एक करोड़ से ज्यादा स्टूडेंट्स हैं जिनकी जिंदगी के साथ मजाक किया गया है सिस्टम द्वारा। इसकी वजह से स्टूडेंट्स बहुत ही ज्यादा एंशियस और परेशान हैं अपने फ्यूचर को लेकर। किसी को तो इसकी जिम्मेदारी लेनी होगी।
कॉकरोचों के सरदार ने ऐलान किया है कि बहुत हुआ तेरा आराम। अब की करेंगे नींद हराम। ये मैं अपने देश अपने घर इंडिया वापस आ रहा हूं। एजुकेशन मिनिस्टर धर्मेंद्र प्रधान का रेजिग्नेशन मांगने के लिए। इतने दिन से आप सब देख ही रहे हो कि हम सोशल मीडिया पर आवाज़ उठा रहे हैं कि पेपर लीक के कारण जिन नीट के बच्चों ने सुसाइड की और जो लाखों स्टूडेंट्स की मेहनत बर्बाद हुई है। उसके लिए तो धर्मेंद्र प्रधान को रिजाइन करना ही चाहिए।
रिजाइन करना होता तो कर चुके होते ना दोस्त। और नहीं करते तो नरेंद्र मोदी में जरा भी नैतिकता होती या उनकी आँखों में शर्म का एक बूंद भी पानी बचा होता तो कैबिनेट से निकालकर धर्मेंद्र प्रधान को बाहर कर चुके होते। लेकिन कागज का शेर हमेशा की तरह ढेर नजर आ रहा है। ये पर्चा लीक का मामला ही नहीं है। अपना प्रधानमंत्री ही लीक है। इतने बड़े ब्लंडर के बाद भी अगर एजुकेशन मिनिस्टर रिजाइन नहीं करते तो इसका मतलब इस देश में अकाउंटेबिलिटी नाम की कोई चीज बची ही नहीं है। ऐसा लगता है कि सिस्टम जितनी चाहे उतनी गलतियां कर सकता है और उसके लिए कोई कंसीक्वेंसेस है ही नहीं। सारे कंसीक्वेंसेस स्टूडेंट्स के लिए हैं। ऐसा कब तक चलेगा? कब तक चलेगा? 12 साल से चल ही रहा है भाई। ये मोदी हैं। पूरे मुल्क से कागज मांगते हैं। और किसी को कोई हिसाब नहीं देते। ना आगे देने का कोई इरादा है। कॉकरोच जनता पार्टी का ऐलान है हिसाब तो देना पड़ेगा। हम लेकर रहेंगे। और वो भी संविधान के दायरे में लोकतंत्र की तहजीब के साथ।
हम सब मिलकर पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस पुलिस स्टेशन जाएंगे और वहां पर जंतर मंतर पर एक पीसफुल प्रोटेस्ट करने के लिए परमिशन मांगेंगे। इंडिया का कॉन्स्टिट्यूशन हमें राइट देता है कि गलत के खिलाफ हम पीसफुल तरीके से अपनी आवाज उठा सकते हैं। उसी कॉन्स्टिट्यूशन के अकॉर्डिंग हम अपनी आवाज उठाएंगे। इतना तोड़ने की कोशिश की लेकिन कॉकरोच टूटे नहीं। और इसके लिए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को थैंक यू बोलना तो बनता है। उस दिन नौजवानों को कॉकरोच और पैरासाइट बताते हुए उन्होंने कल्पना तक नहीं की होगी कि वो एक ऐसे आंदोलन की बुनियाद रख रहे हैं जो एक गैर जिम्मेदार सरकार के निकम्मेपन की चूल हिलाकर रख देगी। और मैं उम्मीद करता हूं कि जितने भी कॉकरोच जनता पार्टी के सपोर्टर्स हैं और जितने भी स्टूडेंट्स और यूथ इस सिस्टम से परेशान हैं वो इस प्रोटेस्ट में शामिल होंगे। जिस-जिस को लगता है धर्मेंद्र प्रधान एजुकेशन मिनिस्टर जो है हमारे उनको रिजाइन करना चाहिए। वो सभी लोग इस प्रोटेस्ट में शामिल हो जाएं।
अब मोदी के मेकअप पोते माथे पर एयर कंडीशन कमरे में भी पसीना छल्छलाया हुआ है। ना विदेशी मशरूम से रुक रहा है और ना ही स्नो पाउडर से। बोले तो बोले क्या? करें तो करें क्या? कॉकरोचों ने बादशाह सलामत के किले पर कील ठोकने का ऐलान कर डाला है। और अब हमारी बारी है अपने देश के लिए कुछ करने की। क्योंकि अगर हम आज कुछ नहीं करेंगे तो कौन करेगा? कब तक हम वेट करेंगे कोई और आएगा आवाज उठाएगा और हमें बचाएगा। हम वेट करेंगे कोई और आएगा आवाज उठाएगा और हमें बचाएगा सो जितने भी पीसफुल और कॉन्स्टिट्यूशन को मानने वाले कॉकरोचेस थे लेट्स ऑल कम टुगेदर टू सेव द फ्यूचर ऑफ मिलियंस ऑफ स्टूडेंट्स मतलब इतना सताया इतना परेशान किया इतने जुल्म ढाये 18 20 साल के बच्चों की आवाज दबाने के लिए 70 80 साल के विष खोपड़ों को झोंक दिया होट कचहरी पुलिस कोतवाली सब कर डाली वो भी तब जब जमीन पर कुछ नहीं था सब कुछ सिर्फ इंस्टाग्राम और ट्विटर पर था मोदी सरकार की कायरता और बच्चों की आवाज से उसकी नफरत का अंदाजा इसी से लगाइए कि सरकार ने इंटेलिजेंस ब्यूरो के इनपुट पर राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए आईटी एक्ट की धारा 69 ए के तहत ट्विटर पर सीजेपी का आधिकारिक अकाउंट भारत में ब्लॉक करवा दिया और हाई कोर्ट ने भी कहा कि अभी अनब्लॉक नहीं कर सकते सरकार के जवाब का इंतजार करेंगे और आईटी रिव्यू कमेटी मामले की जांच करेगी इसके अलावा उनकी आधिकारिक वेबसाइट कॉकरोचजनतापार्टी.ओआरजी को भी भारत में ब्लॉक कर दिया गया.
अभिजीत दिप्के ने दावा किया कि उनके और पार्टी के इंस्टाग्राम अकाउंट्स भी हैक किए गए मोदी का डर देखिए ये सारी कारवाईया भारत के बच्चों से भारत की संप्रभुता को खतरे का बहाना बनाकर की गई जबकि सीजेपी मुख्य रूप से बेरोजगारी परीक्षा पेपर लीक और युवा मुद्दों पर व्यंग कर रहा था सवाल है कि अब क्या करेगी सरकार और क्या करेगी अदालत जब लाखों लाख बच्चे अपने भविष्य के साथ खिलवाड़ के खिलाफ संविधान से मिले अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए नारे बुलंद करेंगे 8 लाख बच्चों ने हमारी पिटीशन साइन की क्रोर्स ऑफ पीपल हैव सपोर्टेड दिस डिमांड ऑन सोशल मीडिया एज वेल एंड नॉट जस्ट दैट देश में कई सारी जगहों पर इसको लेकर प्रोटेस्ट भी तो हो रहे हैं जैसे लखनऊ जयपुर महाराष्ट्र दिल्ली लेकिन फिर भी इनको कोई फर्क नहीं पड़ रहा अब असली सवाल जो आपके दिमाग में भी चल रहा होगा क्या सरकार अभिजीत दिप्के को दिल्ली एयरपोर्ट से खुली हवा में बाहर आने भी देगी या अमेरिका से आने वाली फ्लाइट के दिल्ली उतरते ही मोदी शाह की एजेंसी उन्हें गिरफ्तार कर लेगी.
अभिजीत को भी अंदाजा है कि नरेंद्र मोदी कितने कायर हैं और वो किस हद तक जा सकते हैं मेरे फ्रेंड्स और फैमिली को डर है कि मुझे एयरपोर्ट से ही अरेस्ट कर लेंगे और फिर जेल भेज देंगे लेकिन मुझे अभी भी उम्मीद है कि आज भी हमारा देश एक डेमोक्रेसी है और हमें पीसफुली प्रोटेस्ट करने की परमिशन मिल जाएगी ये मुश्किल है लगभग असंभव जिस तरह से सरकार ने विरोधी आवाजों को कुचला है और खत्म किया है उसे देखते हुए वो किसी भी हद तक जाएगी मोहम्मद जुबैर से लेकर सोनम वांग्शुक कन्हैया कुमार सुधा भारद्वाज और स्टैन स्वामी गौतम नवलखा बरार राव तक नरेंद्र मोदी ने आलोचकों को खत्म करने में जोर जुल्म की सारी मिसाले पीछे छोड़ दी हैं और रही बात जेल के डर की हम कब तक डर कर जिएंगे यार ये देश किसी एक पार्टी का थोड़ी ना है ये देश तो हम सबका है हमारे फ्यूचर का सवाल है हमारे फ्यूचर बर्बाद हो रहा है और ये अब हम सबकी जिम्मेदारी है कि जब भी इस देश में किसी के साथ कुछ गलत हो तो हम सबको आवाज उठानी चाहिए.
मनोज जरांगे पाटील जीवनचरित्र | Biography Marathi
इन अ वेरी पीसफुल एंड डेमोक्रेटिक मैनर लोकतान्त्रिक अधिकार ये क्या होता है आप सरकार के खिलाफ मतलब देश के खिलाफ यही परिभाषा बना दी गई है और मीडिया हर रोज इसे सही साबित करने की फुहड़ कोशिश करता है लेकिन लगता है इस बार मोदी फंस गए हैं बच्चों के भविष्य से खेलना और खेलकर उनका तमाशा बनाना कहीं उनके पैरों तले की जमीन ना खींच ले आई वांट टू मेक इट क्लियर आई एम अ बिग एडमायरर ऑफ गांधी अंबेडकर भगत सिंह एंड नेहरू एंड आई बिलीव इन द कॉन्स्टिट्यूशन ऑफ इंडिया मोर देन एनीथिंग एल्स जो हम सबको एक डेमोक्रेसी में अपनी आवाज रखने का राइट देता है यही वो राइट है जिसे रॉंग साबित करने के लिए मोदी ने 12 साल में देश को नौजवानों के सबसे बड़े नर्क में तब्दील कर दिया ना पढ़ने देंगे ना सोचने देंगे ना लिखने देंगे और ना बोलने देंगे और जो भी बोलेगा उसे देशद्रोही साबित कर देंगे उसके ऊपर एनएसए लगा देंगे यूएपीए लगा देंगे ईडी लगा देंगे.
सीबीआई लगा देंगे जेल में सड़ा देंगे ना मुकदमा चलने देंगे और ना जमानत होने देंगे लेकिन कहते हैं कॉकरोचों को खत्म करना इतना आसान नहीं होता वो परमाणु हमलों में भी बच जाते हैं फिर ये तो मोदी और शाह है मैं चाहता तो यहाँ यूएसए में जॉब लेकर आराम से रह सकता था मुझे मुझे पिछले कुछ दिनों में कई जॉब ऑफर्स भी आई है बट आई एम नॉट गोना टेक इट एज आई हैव डिसाइडेड टू कम बैक टू इंडिया बिकॉज आई लव माय कंट्री एंड आई रियली वांट टू डू समथिंग फॉर माय कंट्री हम सब आज जो कुछ भी है वो सब इस देश ने हमें जो दिया है उसी इस देश ने हमें जो दिया है उसी के कारण है इसके असर को दरकिनार करके अभिजीत दिपके पर हाथ डालना कहीं हाथ ही न जला दे मोदी एंड कंपनी दिन रात लगी हुई है कि अभिजीत दिपके को भारत आने से कैसे रोका जाए और आ जाने के बाद भी जंतर मंतर की तरफ बढ़ने से कैसे रोका जाए.
क्योंकि ये कंपनी जानती है कि अगर कॉकरोचों का झुंड एक बार मैदान में पहुंच गया तो उसके चरण चूमते कुमार विश्वास जैसे दिमकों की किरकुट कवितई की सिंदिया उड़ा देगा मैंने डिसाइड किया है मैं 6 जून सैटरडे सुबह दिल्ली आऊंगा आप सब मुझे एयरपोर्ट पर मिलिए इतने बड़े ब्लंडर के बाद भी अगर एजुकेशन मिनिस्टर रिजाइन नहीं करते तो इसका मतलब इस देश में अकाउंटेबिलिटी नाम की कोई चीज बची ही नहीं है जिस जिस को लगता है धर्मेंद्र प्रधान एजुकेशन मिनिस्टर जो है हमारे उनको रिजाइन करना चाहिए वो सभी लोग इस प्रोटेस्ट में शामिल हो जाएं तो आप किस तरफ हैं देश के बच्चों की तरफ या मोदी की तरफ दिल पर हाथ रखकर फैसला कीजिएगा.
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